ना जादू ना टोना
आस्था का क्षेत्र जहाँ समाप्त होता है ज्ञान का क्षेत्र वहाँ से प्रारम्भ होता है.
सोमवार, 4 मई 2026
ओ तेरे की छींक दिया ना ?
शनिवार, 2 मई 2026
क्या पीपल रात मे केवल ऑक्सीजन छोड़ता है ?
क्या पीपल रात में केवल ऑक्सीजन देता है? एक वैज्ञानिक विश्लेषण
अक्सर यह कहा जाता है कि पीपल रात में भी ऑक्सीजन देता है, जबकि अन्य पेड़ रात मे कार्बन डाइऑक्साइड (CO_2) छोड़ते हैं। इस बात मे कितनी सच्चाई है, आइए इसे फोटोसिंथेसिस (प्रकाश संश्लेषण) के आधार पर समझते हैं:
*1 .फोटोसिंथेसिस (प्रकाश संश्लेषण) क्या है ?* - सभी पेड़ पौधे हमारी ही तरह सजीव हैं और हमारी ही तरह इनके लक्षण हैं जैसे जन्म,पोषण वृद्धि और अंत में मृत्यु । यह अपने बढ़ने के लिए या जीवित रहने के लिए वातावरण से कार्बन डाय आक्साइड लेते हैं और सूरज की रौशनी तथा पत्तियों मे उपस्थित क्लोरोफिल की सहायता से उसे कार्बोहाइड्रट के रूप मे सहेज कर रखते हैं । यही उनका भोजन है और दैनिक गतिविधियों के लिए ऊर्जा है । अपना फूड बनाने की इस प्रोसेस में ऑक्सीजन बाय प्रॉडक्ट के रूप में उत्पन्न होती है तथा एनर्जी कार्बोहाइड्रट के रूप में उनके भीतर जमा हो जाती है ।
लेकिन ऐसा नहीं है कि पौधे सिर्फ कार्बन डाई ऑक्साइड ही लेते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं बल्कि वे इसका उल्टा भी करते हैं जैसे कि वे ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन डाईओक्सिड छोड़ते हैं यह तब होता है जब वे अपने भीतर सहेजें गए केमिकल्ज़ का इस्तेमाल अपनी वृद्धि और अन्य गतिविधियों के लिए करते हैं।
यह प्रोसेस रेसपिरेशन ही है जैसा कि हम करते हैं । इसके अंतर्गत वे ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन डाईऑक्साइड छोड़ते हैं । पेड़ पौधे ऑक्सीजन लेने और छोड़ने तथा कार्बन डाइऑक्साइड लेने और छोड़ने का काम सतत करते हैं सामान्यतः पेड़ पौधे यह काम अपने पत्तियों में बने वॉल्वो के माध्यम से करते हैं जिन्हें स्टोमेटा कहा जाता है । दिन मे सूरज के प्रकाश में उनके स्टोमेटा सेल बंद रहते हैं इसलिए फ़ोटो सिंथेसिस की प्रक्रिया शुरू रहती है और वे co2 लेते हैं लेकिन रात मे रौशनी न होने के कारण इसका विपरीत होता है वे ऑक्सीजन लेते हैं और Co2 छोड़ते हैं । गैसों के एक्सचेंज वाला प्रोसेस कई तरह से होता है । इसमें पेड़ पौधे दो तरह का पाथ वे इस्तेमाल करते हैं । विज्ञान मे पेड़ पौधों के भीतर होने वाली अलग अलग रासायनिक क्रियाओं के आधार पर इन्हे C3 और C4 पाथ वे कहा जाता है । संसार में लगभग 85 % पेड़ों की प्रजाति सी थ्री पाथवे का ही इस्तेमाल करती है लेकिन इनके अलावा एक पाथ वे और होता है जिसे CAM Pathway कहा जाता है
2 . सामान्य पेड़ों और पीपल में या इस तरह के अन्य पौधों में क्या अंतर है?
यह हमने देखा कि ज्यादातर पेड़ दिन मे फोटो सिन्थेसीस के माध्यम से अपना भोजन ग्रहण करते हैं , कार्बन डाय आक्साइड ग्रहण करते हैं और आक्सिजन छोड़ते हैं तथा रात में केवल श्वसन (Respiration) करते हैं, जिससे वे CO_2 छोड़ते हैं। लेकिन पीपल (और एलोवेरा, स्नेक प्लांट जैसे पौधे) CAM (Crassulacean Acid Metabolism) नामक एक विशेष प्रक्रिया या पाथ वे का पालन करते हैं।
*3. यह CAM (Crassulacean Acid Metabolism) नामक एक विशेष प्रक्रिया क्या है*
हमने देखा कि C3 पाथ वे का इस्तेमाल करने वाले पेड़ पौधे दिन में अपना स्टोमटा खोल कर रखते हैं जिससे वे कार्बन डाई ऑक्साइड ग्रहण करते हैं तथा ऑक्सीजन छोड़ते हैं लेकिन CAM पाथ वे का इस्तेमाल करने वाले पेड़ पौधे दिन में अपना स्टोमैटा बंद करके रखते हैं । इस पाथवें का इस्तेमाल उन पेड़ पौधों द्वारा किया जाता है जो बहुत सूखी जगहों में या जहाँ पर पानी का अभाव होता है वहाँ पैदा होते हैं या फिर दीवार पर या पेड़ों के तनों आदि पर पैदा होते हैं या वहाँ जहां पानी की बहुत कमी होती है। स्टोमैटा बंद करके रखने के कारण उनके पत्तों मे नमी बनी रहती है और धूप मे वे सूख नहीं पाते ।
लेकिन सवाल यह है कि इस प्रक्रिया में दिन में रंध्र छिद बंद होने के कारण वातावरण से कार्बन डाय आक्साइड लेना और ऑक्सीजन छोड़ना तो नहीं हो पाता तो वे यह काम रात को करते हैं अर्थात उनके स्टोमेटा के छिद्र रात मे खुलते हैं वे रात मे कार्बन डाय आक्साइड लेते और उनसे कई तरह के एसिड बनाकर अपने भीतर जमा कर लेते हैं जैसे पीपल रात में श्वसन तो करता है, लेकिन वह अपनी छोड़ी हुई और वातावरण की CO_2 को बाहर निकालने के बजाय भीतर सोख लेता है। वह इस CO_2 को 'मैलिक एसिड' के रूप में अपने पत्तों में स्टोर कर लेता है। इस रासायनिक प्रक्रिया के दौरान उप-उत्पाद (By-product) के रूप में ऑक्सीजन (O_2) मुक्त होती है। यद्यपि इसकी मात्रा दिन में छोड़ी है ऑक्सीजन की मात्रा से बहुत ही कम लगभग न के बराबर रहती है ।यह प्रोसेस उस समय अधिक होती है जब ऐसे पेड़ पौधे कठिन परिस्थिति मे जैसे दीवार पर सूखी जगह पर या जहां पानी की कमी होती है बढ़ते हैं । आपने भी दीवार पर उगे पीपल के पेड़ को देखा होगा।
4 . मैलिक एसिड का उपयोग:
हमने देखा कि कैम पाथ वे का इस्तेमाल करने वाले पेड़ पौधे जब मैलिक एसिड को अपने भीतर रात मे सहेज कर रख लेते हैं तो उसका उपयोग क्या करते हैं । अगले दिन जब सूरज निकलता है, तो यह पेड़ पौधे अपने रंध्र (Stomata) बंद कर लेते हैं ताकि पानी वातावरण मे न उड़े और फिर रात में जमा किए गए इसी 'मैलिक एसिड' को तोड़कर CO_2 निकालते है और अपना भोजन बनाते है।
5. फिर आक्सिजन का क्या होता है
यह प्रश्न स्वाभाविक है कि फ़ोटो सिंथेसिस के दौरान बनी हुई ऑक्सीजन का क्या होता है ? कैम पाथवे का इस्तेमाल करने वाले पेड़ पौधे जब स्टोमेटा बंद कर लेते हैं तो फिर ऑक्सीजन कैसे रिलीज करते हैं ? हाँ वे ऑक्सीजन रिलीज़ अवश्य करते हैं लेकिन दिन में कुछ कम और रात में जब उनके रंध्र पूरी तरह खुल जाते हैं कुछ अधिक आक्सिजन रिलीज करते हैं । इस तरह से उनकी यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है
6 . लेकिन क्या यह पीपल के पेड़ पर भी लागू होता है या यह केवल एक मिथ है?
यह पूरी तरह मिथ नहीं है, दरअसल यह प्रोसेस तब अधिक होती है जब पीपल का पेड़ छोटा होता है या वह ऐसी जगह पर उगता है जैसे दीवाल पर या किसी सूखी जगह पर जहाँ पर नमी बिल्कुल नहीं होती उस समय उसको नमी की आवश्यकता होती है और वह CAM पाथवे का उपयोग करता है। लेकिन जैसे जैसे वो बड़ा होता जाता है ऐसा माना जाता है कि तब वह C3 pathway में स्विच कर लेता है और अन्य पेड़ों की तरह ही व्यवहार करता है । यद्यपि यह एक विशेष जैविक अनुकूलन है और ऐसी स्थिति मे पीपल अन्य पेड़ों की तरह रात में CO_2 पैदा तो करता है, लेकिन उसे वातावरण में अधिक मात्रा में रिलीज नहीं करता, बल्कि उसकी ज्यादातर मात्रा 'रीसायकल' कर लेता है। इससे वातावरण में ऑक्सीजन का स्तर बना रहता है।
इसी श्रेणी में स्नेक प्लांट,कुछ विशेष तरह के कैक्टस प्लांट, आर्किड, एलोवेरा और पाइनेपल जैसे पौधे भी आते हैं जो पीपल से अधिक कैम पाथवे का उपयोग करते हैं । इनमें हम कई तरह की उन झाड़ियों को भी शामिल कर सकते हैं जो बहुत सूखी जगहों पर भी उगी रहती हैं। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि क़ैम पाथवे का उपयोग करने वाले पेड़ पौधे अन्य पौधों की तुलना में अधिक ऑक्सीजन रिलीज करते हैं , वे भी अन्य पौधों की तरह ही ऑक्सीजन रिलीज करते हैं लेकिन यदि वे दिन में ज़्यादा नहीं कर पाते तो रात को कर लेते है अर्थात कुल मिलाकर 24 घंटे मे रिलीज होने वाली आक्सिजन की मात्रा उतनी ही रहती हैं।
पीपल की तरह इस तरह के अन्य पौधे भी एक 'प्राकृतिक एयर प्यूरीफायर' की तरह है जो किसी एक पाली मे नहीं बल्कि 24 घंटे वातावरण से CO_2 कम करने और ऑक्सीजन का संतुलन बनाए रखने में सक्षम है।
*वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं अंधविश्वास भगाएं*
शरद कोकास
बुधवार, 22 अप्रैल 2026
एक गोत्र में शादी क्यूँ नहीं की जाती
देख रहा था ... उस प्रोग्राम में एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने कहा की जेनेटिक बीमारी न हो इसका एक ही इलाज है और वो है "सेपरेशन ऑफ़ जींस" मतलब अपने नजदीकी रिश्तेदारो में विवाह नही करना चाहिए ..क्योकि नजदीकी
रिश्तेदारों में जींस सेपरेट (विभाजन) नही हो पाता और जींस लिंकेज्ड बीमारियाँ जैसे हिमोफिलिया, कलर ब्लाईंडनेस, और एल्बोनिज्म होने का १००% चांस होता है .. फिर मुझे बहुत ख़ुशी हुई जब उसी कार्यक्रम में ये दिखाया गया कि आखिर हिन्दूधर्म में हजारों सालों पहले जींस और डीएनए के बारे में कैसे लिखा गया है ? हिंदुत्व में कुल सात गोत्र होते है और एक गोत्र के लोग आपस में शादी नही कर सकते ताकि जींस सेपरेट (विभाजित) रहे.. उस वैज्ञानिक ने कहा कि आज पूरे विश्व को मानना पड़ेगा की हिन्दूधर्म ही विश्व का एकमात्र ऐसा धर्म है जो "विज्ञान पर आधारित" है !"
वास्तव मे जींस और डी एन ए की खोज बहुत बाद में हुई है , हिन्दू धर्म से इसका कोई सम्बन्ध नहीं है । हिन्दुओ में ही नहीं बल्कि विश्व के सभी लोगों में इतना रक्त सम्मिश्रण हो चुका है कि अब रक्त सम्बन्धियों में विवाह होने के बावजूद इस तरह की जेनेटिक बीमारी होने की कोई संभावना बहुत कम है । विश्व के बहुत से समुदायों में रक्त सम्बन्धियों में विवाह होते हैं लेकिन इन बीमारियों का प्रमाण उतना ही है जितना रक्त सम्बन्धियों में विवाह न होने का । जींस का सेपरेशन लगातार होता है , मधुमेह जैसी बीमारी भी सगे भाई बहनों में सभी को नहीं होती , इसके अन्यान्य कारण हैं । ऐसा कोइ भी धर्म नहीं है जो विज्ञान पर आधारित हो । धर्म की रुढियों और मान्यताओं को विज्ञान नकारता है ।
हिन्दू धर्म और विशेष रूप से उत्तर भारतीय समाजों में 'समान गोत्र' (सगोत्र) में विवाह न करने की परंपरा के पीछे पौराणिक मान्यताएं और आधुनिक आनुवंशिक (Genetic) तर्क, दोनों ही दिए जाते हैं।
इसे समझने के लिए हम इसे तीन मुख्य हिस्सों में देख सकते हैं:
1. धार्मिक एवं पौराणिक आधार
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 'गोत्र' का अर्थ उस मूल ऋषि से है जिससे किसी कुल का वंश आरंभ हुआ।
सहोदर भाव: एक ही गोत्र के होने का अर्थ है कि वे व्यक्ति एक ही पूर्वज की संतानें हैं। इस नाते वे आपस में भाई-बहन माने जाते हैं।
ऋषि परंपरा: माना जाता है कि सभी हिन्दू सप्तऋषियों की ही संतानें हैं। इसलिए एक ही गोत्र में विवाह को 'अगम्य गमन' (Incest) की श्रेणी में रखा गया है।
2. वैज्ञानिक आधार (Genetics)
विज्ञान के दृष्टिकोण से इसे 'Inbreeding Depression' के जोखिम से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि 'गोत्र' पूरी तरह से वैज्ञानिक शब्द नहीं है, लेकिन इसके पीछे का तर्क आनुवंशिक है:
समान जींस का प्रभाव: एक ही कुल या वंश में विवाह करने से परिवार के 'रिसेसिव जींस' (Recessive Genes) के आपस में मिलने की संभावना बढ़ जाती है। यदि कुल में कोई आनुवंशिक बीमारी है, तो वह अगली पीढ़ी में उभरने का खतरा ज्यादा होता है।
विविधता (Diversity): विज्ञान मानता है कि दो अलग-अलग वंशों (Gene Pools) के बीच विवाह होने से संतान अधिक स्वस्थ और मानसिक रूप से सुदृढ़ होती है क्योंकि उसे जींस की विविधता मिलती है।
क्रोमोसोम का तर्क: गोत्र मुख्य रूप से पिता से पुत्र में जाने वाले Y-Chromosome पर आधारित माना जाता है। एक ही गोत्र में विवाह करने से Y-Chromosome का नवीनीकरण नहीं हो पाता।
चलिए अब इसे अन्य धर्मों और संस्कृति के आधार पर देखते है
3. अन्य धर्मों में रक्त संबंधियों में विवाह और उसके प्रभाव
हाँ, कई संस्कृतियों और धर्मों (जैसे इस्लाम, या दक्षिण भारत के कुछ समुदायों) में चचेरे-ममेरे भाई-बहनों के बीच विवाह (Consanguineous Marriage) मान्य है। इसके प्रभावों पर शोध बताते हैं:
| पक्ष | प्रभाव |
| आनुवंशिक विकार | रक्त संबंधियों में विवाह से बच्चों में जन्मजात दोष (Congenital disabilities), अंधापन, या चयापचय (Metabolism) संबंधी बीमारियों का खतरा उन लोगों की तुलना में अधिक होता है जो पूरी तरह अलग वंश में विवाह करते हैं। |
| प्रतिरोधक क्षमता | जींस में विविधता कम होने के कारण ऐसी संतानों की बीमारियों से लड़ने की क्षमता (Immunity) तुलनात्मक रूप से कम हो सकती है। |
| सामाजिक तर्क | इन समुदायों में संपत्ति के बंटवारे को रोकने और पारिवारिक एकता को बनाए रखने के लिए इसे प्राथमिकता दी जाती है। |
हालांकि, आधुनिक समय में हजारों वर्षों के बाद एक ही गोत्र के लोगों के बीच जींस का सीधा संबंध बहुत कम रह गया है, फिर भी जैविक स्वास्थ्य की दृष्टि से अलग-अलग वंशों में विवाह करना हमेशा श्रेष्ठ क्यों माना जाता है?
1. रक्त सम्मिश्रण और 'रिसेसिव जींस' (Recessive Genes) का खेल क्या है ?
भले ही सदियों से रक्त का सम्मिश्रण हुआ हो, लेकिन Recessive Genes का खतरा अभी भी खत्म नहीं हुआ है।
छिपे हुए गुण: हमारे शरीर में हर जीन के दो सेट होते हैं। कुछ बीमारियाँ (जैसे थैलेसीमिया या सिस्टिक फाइब्रोसिस) तभी होती हैं जब माता और पिता दोनों से खराब जीन मिले।
संभावना का तर्क: यदि आप अपने गोत्र से बाहर विवाह करते हैं, तो इस बात की संभावना बहुत कम हो जाती है कि आपके साथी के पास भी वही 'छिपा हुआ खराब जीन' होगा जो आपके पास है। लेकिन एक ही कुल में, वह खराब जीन पीढ़ी दर पीढ़ी सुप्त (Dormant) अवस्था में चलता रह सकता है और समान जीन मिलते ही बीमारी के रूप में प्रकट हो सकता है।
2. भाई-बहनों में बीमारी अलग अलग क्यों होती है?
हालांकि ऐसा न मानने का एक कारण यह भी है कि ऐसी संभावना बहुत कम होती है जैसे कि सगे भाई बहनों में से भी मधुमेह या इसी तरह की बीमारी सभी को क्यों नहीं होती ? यह एक बहुत ही तार्किक और गहरा सवाल है।
यह तर्क बिल्कुल सही है कि सगे भाई-बहनों को भी एक जैसी बीमारियाँ नहीं होतीं। इसका कारण 'Genetic Recombination' है:
रैंडम मिक्सिंग: जब बच्चा पैदा होता है, तो उसे माता-पिता से 50-50% जींस मिलते हैं, लेकिन यह कौन से 50% होंगे, यह पूरी तरह रैंडम (यादृच्छिक) होता है।
उदाहरण: मान लीजिए माता-पिता के पास मधुमेह (Diabetes) का जीन है। मुमकिन है कि एक बच्चे को वह हिस्सा मिले जिसमें मधुमेह के जीन सक्रिय हों, और दूसरे को वह हिस्सा मिले जो स्वस्थ हो।
जोखिम बनाम निश्चितता: विज्ञान 'निश्चितता' की बात नहीं करता, बल्कि 'जोखिम' (Probability) की बात करता है। सगे भाई-बहनों या एक ही गोत्र में विवाह करने से बीमारी होने की संभावना (Risk Factor) बढ़ जाती है, यह जरूरी नहीं कि बीमारी होगी ही।
अब अंतिम बात यह कि क्या आज के समय में गोत्र मायने रखता है?
आज के वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में, 'गोत्र' से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण 'निकटता' मायने रखती है।
दूरी का लाभ: सगे भाई-बहन सबसे निकट हैं (अधिक जोखिम), चचेरे-ममेरे भाई बहन थोड़े दूर (कम जोखिम), और एक ही गोत्र के अनजान लोग बहुत दूर (नगण्य जोखिम)।
आधुनिक स्थिति: क्योंकि अब जनसंख्या बहुत बढ़ चुकी है और लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर बस चुके हैं, इसलिए एक ही गोत्र के दो अनजान लोगों के बीच जींस का मिलन होना अब उतना खतरनाक नहीं रहा जितना शायद हजारों साल पहले रहा होगा जब कबीले छोटे थे।
यही कारण है कि आज के जेनेटिक एक्सपर्ट गोत्र के बजाय 'Family Medical History' और 'Genetic Screening' पर ज्यादा जोर देते हैं।
क्या आपको लगता है कि सामाजिक परंपराओं को अब वैज्ञानिक परीक्षणों (जैसे ब्लड टेस्ट) के आधार पर बदल जाना चाहिए?
आज के समय में 'एक ही गोत्र' में विवाह करने से किसी बड़ी बीमारी का खतरा उतना नहीं है जितना कि 'निकट रक्त संबंध' (जैसे सगे या चचेरे रिश्तेदारों) में विवाह से है। गोत्र की परंपरा अब वैज्ञानिक से ज्यादा एक सांस्कृतिक पहचान बनकर रह गई है।
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान अब गोत्र देखने के बजाय 'Genetic Screening' (कुंडली के बजाय जींस का मिलान) की सलाह देता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि माता-पिता के जींस में कोई ऐसी समानता तो नहीं जो बच्चे के लिए घातक हो।
गुरुवार, 21 मई 2020
तुम्हारी चोटी में सितारे गूँथ दूँगा
विज्ञान
की दृष्टि से देखा जाये तो सूर्य ग्रह नहीं बल्कि तारा है । चन्द्रमा गृह नहीं
बल्कि उपग्रह है तथा ,
राहू और केतु नामक ग्रह
काल्पनिक हैं और इनका सौर मंडल में कोई
अस्तित्व नहीं है । जिस ग्रह पृथ्वी
पर हम रहते हैं उसका भी इन नवग्रहों में उल्लेख नहीं है ।मंगलवार, 28 अप्रैल 2020
ज़िंदगी क्या है जान गए ना ?
आप
में से ऐसा कोई नहीं होगा जिसने कभी ज़िंदगी के बारे में न सोचा हो । कोई कहेगा
ज़िन्दगी एक पहेली है कोई कहेगा जीवन पानी का बुलबुला है ,जीवन एक उड़ती हुई पतंग है
वगैरह वगैरह । जीवन के बारे में हर कवि ने दो चार पंक्तियाँ तो लिख ही डाली हैं ।
निदा फाज़ली साहब का मशहूर शेर है ..शरद कोकास
गुरुवार, 7 सितंबर 2017
आप भी करोड़पति बनना चाहते हैं?
गुरुवार, 31 अगस्त 2017
मुझे कुछ लोगों के पढ़े -लिखे होने पर शक हैं
![]() |
| डॉ नरेंद्र नायक अन्द्धश्रद्धा के खिलाफ़ प्रदर्शन करते हुए |

