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शनिवार, 16 मई 2009

लाल पंजे वाला भूत


लाल पंजे वाला भूत


जब हम अन्धश्रद्धा निर्मूलन का काम शुरू करते हैं तो हमारी मुलाकात ऐसे अनेक लोगों से होती है जिनके पास भूत प्रेत के ढेरों किस्से होते हैं.ये किस्से पीढी दर पीढी चलते रहते हैं.फिर मनोहारी कहानियाँ.सच्ची कहानियाँ जैसी पात्रिकाओं में ऐसे किस्से छपते रहते हैं.भूत प्रेत पर फिल्में बनती हैंजो खूब चलती हैं.जादू-टोना,भूत प्रेत पर धारावाहिक बनते हैंजिनक बडा टी.आर.पी. होता है.भूत के बारे में सबके अपने अपने अनुभव होते हैंजिन्हे सब अपने अपने तरीके से बताते हैं.सब यही कहते हैंकि हमने ऐसा सुना है या हमने फलानी फलानी किताब मे ऐसा पढा है.कुछ लोग इससे भी आगे बढकर कहते हैं कि हमने भूत देखा है.यह कैसे होता है और इसका क्या मनोविज्ञान है इस पर तो मै आगे कि पोस्ट मे बात करुंगा फिल्हाल यह कि भूत प्रेत के यह किस्से पीढीयों से हस्तांतरित होते हुए हम तक पहुंचे हैं जिसके फलस्वरूप हम ऐसी स्थिती में हैं कि ऐसा हो भी सकता है और ऐसा नही भी हो सकता है.चलिए इस पर बात तो होती रहेगी.आपको मै एक किस्सा सुनाता हूँ जो मैने नागपुर की अन्धश्रद्धानिर्मूलन समिति के श्री हरिश देशमुख से सुना.

नागपुर मे एक जगह है तेलनखेडी.बरसों पहले वहाँ पर घनी आबादी का अभाव था.यहाँ तक कि लोग उस ओर जाने से भी कतराते थे .ऐसा कहते थे कि उस निर्जन स्थान मे भूत रहते हैं.इन भूतों मे मे भी एक भूत बहुत प्रसिद्ध था”लाल पंजे वाला भूत”.लोग बताते थे कि वह लोगों को मारकर उनका हाथों की अंजुली से उनका खून पीता है इस वज़ह से उसके हाथ हमेशा लाल दिखाई देते हैं.एक बार पता चला कि तीन लडके वहाँ बेहोश पाये गये.हुआ यह था कि भूत को देखने की उत्सुकता मे वे तीनों शाम को वहाँ पहुंचे.दूर दूर तक उन्हे कोई नही दिखाई दिया.काफी दूर जाकर उन्हे एक पान की दुकान दिखाई दी. वे पानवाले के पास पहुंचे और उससे पूछा”भैया इधर कोई लाल पंजे वाला भूत रहता है क्या?” पानवाले ने हंसकर कहा “मेरी कई साल से यहाँ पान की दुकान है यहाँ कोई भूत-वूत नही है.चलो भागो यहाँ से” लडके ज़िद करने लगे “नही भैया हमने सुना है यहाँ एक भूत है उसके लाल लाल हाथ हैं” पान वाले ने अपने कत्थे से रंगे हुए हाथ दिखाये और कहा “ऐसे हैं क्या?”इसके बाद का किस्सा तो पान वाले ने ही अपने ग्राहकों को बताया क्योंकि लडके तो बेहोश हो गये थे.अब पता नही सचमुच बेहोश हुए थे या नही?

कुल मिलाकर यह कि ऐसे किस्से एक कान से दूसरे कान तक जाते हुए बढते ही जाते हैं मैने भी शायद एकाध बात अपनी तरफ से जोड दी हो .आप भी जोड दीजियेगा.हाँ इस बात का खयाल रखियेगा कि इस किस्से से भूत प्रेत पर सुनने वाले का विश्वास बढता है या समाप्त हो जाता है. वैसे यह इतना आसान नही है लेकिन मुझसे बात करते रहिये और अपने मस्तिष्क का उपयोग करते रहिये.वैज्ञानिक चेतना का प्रसार इसी तरह होगा. फिलहाल इतना ही.

आपका

शरद कोकास