गुरुवार, 3 सितंबर 2009

किस धोखे में हैं आप डॉक्टर के पास जाईये

आज एक मित्र के साथ कहीं जाने के लिये उनके घर से बाहर निकला ही था कि उन्हे छींक गई । तुरंत उनकी पत्नी ने कहा थोड़ा रुक जाईये जी यह अपशकुन है “ मैने सोचा ,चलो भाभी हैं , थोड़ा हँसी-मज़ाक कर ही लिया जाये सो मैने पूछा “ क्या हो जायेगा भाभी जी अगर घर से निकलते समय छींक आ गई तो ? “ उन्होने कहा “ अरे आपको मालूम नहीं इससे दुर्घटना की सम्भावना बढ़ जाती है । “ मैने अपने तरकश से तर्क का तीर निकाला और कहा “ मतलब दुनिया में जितनी दुर्घटनाएँ होती हैं सब लोग अपने घर से निकलते समय छींकते ज़रूर होंगे ?” वो बोलीं “ क्या भाई साहब आप भी मज़ाक करते हो ,ऐसा कहीं होता है । “ मैने कहा “ ऐसा नहीं होता तो फिर ठिठकने की क्या ज़रूरत ? उन्होने दूसरा कारण दिया “नहीं भाई साहब ऐसा नहीं ,इससे बना-बनाया काम बिगड़ जाता है “ मैने फिर उसी तीर को प्रत्यंचा पर चढ़ाया और कहा “ मतलब जितने लोगों के काम बिगड़ते हैं सब घर से छींकते हुए निकलते हैं ? “ उन्होने एक वाक्य में मुझे रिजेक्ट करते हुए कहा “ आपसे तो बहस करना बेकार है भाई साहब । “ फिर भी मैने कहा “भाभीजी, ऐसा नहीं है । छींक शरीर की एक रक्षात्मक प्रणाली है ,जो नाक में जबरन घुस आये धूल मिट्टी के कण को बाहर निकालने के लिये है । किसी गन्ध या धुयें या कीटाणु की वज़ह से भी छींक आ सकती है । नाक का यह भीतरी हिस्सा इतना सम्वेदनशील होता है कि ज़रा भी ज़बरदस्ती बरदाश्त नही कर सकता । कई बार जुकाम में इतनी छींक आती है कि रोके नही रुकती । हमारे एक मित्र थे जो बीच–बाज़ार में रहते थे और जुकाम के कारण दिन भर आते जाते छींकते रहते थे और न कोई दुर्घटना होती थी न काम बिगड़ता था ।लेकिन जब भी वो ससुराल जाते थे उनका जुकाम गायब हो जाता था इसलिये कि उनकी ससुराल पहाड़ी प्रदेश में थी ,जहाँ कोई प्रदूषण नहीं था । इसलिये छींक आने का सम्बन्ध शुभ होने से है अशुभ होने से

वैसे यह अच्छी बात है कि सभी छींको को अशुभ नहीं माना जाता । कुछ लोग छींक आते ही कहते हैं “ शायद कोई याद कर रहा है ।“ फिर उस की याद आते ही उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है । कुछ लोग बातचीत के बीच में छींक आते ही कह उठते है “ देखा, सही बात । “ मानो छींक हो आई एस आई की मुहर हो वैसे छींक और याद का थोड़ा बहुत सम्बन्ध तो मै भी मानता हूँ, इसलिये चलते चलते आपको एक मुफ्त नुस्खा दे ही डालता हूँ । मान लीजिये आपको छींक आ ही जाये तो समझिये आपको कोई याद कर रहा है । दूसरी छींक आ जाये तो समझिये कि बहुत ज़्यादा याद कर रहा है । फिर तीसरी छींक आ जाये तो समझिये कि वह आपको अपने पास चाहता है । चौथी छींक आ जाये तो समझिये कि वह बगैर आपसे मिले रह ही नहीं सकता है और फिर पाँचवी छींक आ जाये तो.. किस धोखे में हैं आप ..? डॉक्टर के पास जाईये , आपको जुकाम हो चुका है

वैसे आप क्या सोच रहे हैं ॥भाभीजी मेरी बकवास सुनने के लिये अब तक रुकी होंगी ? हर पढ़े-लिखे का यही हाल है भैया । ठीक ,अगली बार बिल्ली के रास्ता काटने पर बात करेंगे । बेशक कुछ नया ही बताउंगा मै ।

आपका -शरद कोकास

(छवि गूगल से साभार)

21 टिप्‍पणियां:

  1. अआआआआआआआआआआआ छीं
    अब हम आज की टिपण्णी नही देगे, अजी आशुभ ना हो जाये, कल मिलते है.
    राम राम राम राम

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  2. चलो भाभी ने तो अपना काम कर लिया। आप बात करने के बहाने रुक ही गए दो मिनट। फिर भाभी क्यों रुकतीं?

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  3. पुरानी स्थापित मान्यतायें हैं...ऐसे नहीं जाने वाली. :)

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  4. बहुत खूब
    बहुत सही बहुत सार्थक विश्लेषण (!) मनोरम लहजे मे

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  5. छींक बहाने हम तो यहां रुक लिये :-)

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  6. बढिया विश्‍लेषण है छींक का .. मैने भी दों चार दिन पूर्व शकुन पद्धतिपर एक पोस्‍ट किया है .. कृपया नजर डालें !!

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  7. अच्छा विश्लेषण्!!!
    भाभी जी के साथ बढिया सिरखपाई:)

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  8. PEHLI CHEENK PAR KAHAA JAATAA HAI KI GOD BLESS YOU ,DOOSREE PAR PEHLE WAALI KAAT DI JAATEE HAI MAGAR SAHEB TEESREE CHEENK PAR TO DOCTOR KE PAAS HI JAANE KI SALAAH DI JAATEE HAI.
    JHALLI-KALAM,-SE
    JHALLI GALLAN
    ANGREZI-VICHAR.BLOGSPOT

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  9. इसी से मिलती-जुलती एक बात यहाँ करता हूँ. भारत में लगभग सभी लोग शुभ मुहूर्त देखकर वाहन खरीदते हैं और अपने वाहन में अपने आराध्य देवी-देवता की स्थापना भी करते हैं. फिर भी सबसे ज्यादा वहां दुर्घटनाएं और उनमें जान-माल की हानि भारत में होती है. इसका सीधा सा अर्थ है कि कोई मुहूर्त या देवता काम नहीं आता बल्कि सावधानी से और नियमों का पालन करने पर ही दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है. कई विकसित देशों में गाडियां यहाँ से भी अधिक रफ्तार से चलती हैं लेकिन वहां लोग नियमों का पालन करके गाड़ी चलाते हैं.

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  10. शरद जी हमे भी छीँक आयी थी तो सोचा जरूर कोई कम्मेन्ट के लिये याद कर रहा है बस णेत आन करते ही आपका ब्लाग सामने आया। चलो छींक का कुछ तो फायदा हुया हा हा हा

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  11. shukia.
    andhvishvason par aapka art.bahut intresting aur qabile taarif laga.

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  12. ऐसा कोई नहीं है जो किसी न किसी तरह
    शुभ-अशुभ के संताप से घिरा न हो !

    बढ़िया पोस्ट
    आभार

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  13. kuch cheeje bachpan se sun sunkar hmari dinchrya me rach bas jati hai adt ban jati hai .vaise sab jante hai isse kuch hoga nhi par andar khi thoda dar baitha hua rhta hai .us dar ko nikalne ki der hai .aapka aalekh achha lga
    abhar

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