मंगलवार, 23 जून 2009

वैज्ञानिक चेतना के ब्लॉगर्स सलाह दें

ब्लॉगिंग की दुनिया में घोषित रूप से वैज्ञानिक दृष्टि में विश्वास रखने वाले ब्लॉग्स बहुत है जिनमें ब्लॉग कुदरतनामा के ज़रिये श्री बाल्सुब्रमणियम भुजंग के ज़रिये सुश्री लवली कुमारी और श्री अरविन्द मिश्रा तथा साईंस ब्लोगर असोसिएशन एवं तस्लीम के माध्यम से श्री ज़ाकिर अली रजनीश , डॉ.अरविन्द मिश्रा,श्री ज़ीशान हैदर ज़ैदी सुश्री अर्शिया अली और् कवि कुमार अम्बुज जैसे लोग यह काम बखूबी कर रहे हैं.वर्तमान समय में इ बात की आवश्यकता है कि सामान्य जन के भीतर न केवल वैज्ञानिक दृष्टि अपितु इतिहास बोध भी जागृत किया जावे.वस्तुत: वर्तमान दौर में पूंजीवाद ने बाज़ार के साथ-साथ धर्म पर भी आधिपत्य कर लिया है. यह इतनी चालाकी के साथ हुआ है कि पूरी न पीढी इसकी चपेट में आ गई है.धार्मिक जुलूस पहले भी निकाले जाते थे लेकिन अब उनमें उन्माद का प्रदर्शन होने लगा है.एक धर्म की प्रतिद्वन्दिता में दूसरा धर्म इस उन्माद का प्रदर्शन और अधिक ज़ोर शोर से करता है.धर्म और ईश्वर पर अवलम्बिता बढती ही जा रही है अत: धार्मिक स्थलों पर भीड भी बढने लगी है.ईश्वर को चढाये जाने वाले प्रसाद ने अब घूस का रूप धारण कर लिया है और मनुष्य तथाकथित पाप से मुक्त होकर तमाम अनैतिक कार्यों में लिप्त रहने लगा है.मनुष्य की धर्मभीरुता और अन्धविश्वास के प्रति सकारात्मक सोच के फलस्वरूप न केवल धर्म की शक्तियाँ बल्कि बाज़ार की शक्तियाँ तथा राजनैतिक शक्तियाँ भी इसका लाभ उठाने में लगी हैं.इसलिये अन्धश्रद्धा का शिकार होने या तांत्रिकों द्वारा ठगे जाने को अब केव किसीकी व्यक्तिगत हानि मानक नज़र अन्दाज़ नहीं किया जा सकता.अन्द्धश्रद्धा निर्मूलन समिति,तर्कशील सोसायटी और अन्य संस्थाओं द्वारा दिये गये चमत्कार साबित करने विषयक चेलेंज को स्वीकार करने हेतु कोई पाखंडी बाबा या ज्योतिषी सामने नहीं आता इसलिये कि वे जानते हैं अन्धश्रद्धालू जनता जब तक उनके साथ है वे धनार्जन करते रहेंगे.सत्ताधीशों और पूंजीपतियों का प्रश्रय भी उन्हे प्राप्त है.ड्रुग एण्ड मेजिकल रेमेडी एक्ट 1954 में लागू हुआ था लेकिन इसके तहत अब तक कितने लोगों पर कारवाई हुई है? हमारे शहर मे कोई बाबा आता है किसी लॉज में ठहरता है,स्थानीय अखबार में विज्ञापन देता है और पुत्र उत्पन्न होने की भभूत बेचकर पैसा लूटकर चला जाता है. कितने लोग है जो इस बात की शिकायत करते है.कितने लोगों को पता है कि इस एक्ट के अंतर्गत न केवल बाबा पर बल्कि अखबार के मालिक पर भी मुकदमा दायर किया जा सकता है.दर असल यह स आम जन के बीच वैज्ञानिक चेतना ना होने की वज़ह से है .और इस चेतना के प्रसार के लिये जनता के उचित प्रशिक्षण की आवश्यकता है.लेकिन प्रश्न यह है कि यह सब कौन करेगा.क्या हमारे जैसे चन्द ब्लॉगर मिलकर इस काम को कर सकेंगे? वर्षों से अनेक संस्थायें इस दिशा में कार्य रत हैं लेकिन यह समस्या कम होने की बजाय बढती ही जा रही है. फिर भी यह निराश होने का समय नही है.मिल जुल कर मनुष्य को इस मनुष्य निर्मित आपदा से बचाया जा सकता है.

मै अपने स्तर पर यह कार्य कर रहा हूँ.तथा स्कूलों,कॉलेजों मे छात्रों के बीच जाकर अपने व्याख्यान "मस्तिष्क की सत्ता' के माध्यम से वैज्ञानिक दृष्टि का प्रसार करता हूँ.इस व्याख्यान को रोल प्ले तथा सहायक सामग्री फ्लिप चार्ट आदि की सहायता से मैं प्रस्तुत करता हूँ.इसके अंतर्गत बृह्मांड की उत्पत्ति से लेकर सूर्य,गृहों व पृथ्वी के जन्म ,मनुष्य के जन्म तथा उसके आज तक के विकास में अथवा उसके अन्धविश्वास में उसके मस्तिष्क की भूमिका,व्यक्तित्व का विकास,संस्कारों की भूमिका ,आत्मा का अस्तित्व,मनोविज्ञान के laws of suggetions भूत-प्रेत व ढोंगी बाबाओं के किस्से आदि को मै अत्यंत रोचक एवं मनोरंजक ढंग से समझाता हूँ.कवितायें, चुटकुले,मीमीक्री आदि तत्वों से युक्त मेरा प्रस्तुतिकरण इतना रोचक होता है कि लगभग ढाई-तीन घंटे कोई अपने स्थान से हिलता नही हैं.इतनी देर मे सारे अन्धविश्वास दिमाग से निकल जाते है. ब्लॉग के माध्यम से इस आवश्यक एवं महत्वपूर्ण कार्य को करने वाले अपने अनेक साथियों को देखकर मुझमें आशा का संचार हुआ है और यह विचार मन में आया है कि इस व्याख्यान को स्क्रिप्ट का स्वरूप देकर और इसकी रोचकता को यथावत रखकर इसे ब्लॉग पर प्रस्तुत करूँ.आप सभी शुभचिंतकों,ब्लॉगर्स एवं पाठकों की राय इस बारे में आमंत्रित है. इसे यह नया स्वरूप देने में मुझे कुछ समय लग सकता है.तब तक बाबाओं के किस्से,पोल खोल के किस्से और चमत्कारों का भंडाफोड आदि चलते रहेंगे. कृपया इस बारे मे सुधी साथी मुझे सुझाव दें
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आपका:शरद कोकास

19 टिप्‍पणियां:

  1. आगे बढ़ते चलिए और इस जन्म को सार्थक करिए !

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  2. You can also visit my blog, I do write often about science, biotech and society and science often.

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  3. यह बहुत अच्छा प्रयास है। मेरा सुझाव है कि इसे व्यापक स्वरूप देने के लिए हर स्कूल में एक विज्ञान मंडली स्थापित करने पर विचार करें, जिसके कुछ शिक्षक और 9वीं से लेकर 12वीं तक के छात्र-छात्राएं स्वेच्छा से सदस्य बन सकते हैं।

    विज्ञान की चर्चाएं इस मंडली में नियमित रूप से की जा सकती है। मंडली के सदस्य नुक्कड नाटक आदि के माध्यम से समुदाय में भी वैज्ञानिक चिंतन को प्रसारित कर सकते हैं और अंधविश्वासों का उन्मूलन कर सकते हैं।

    बच्चों की बातों का लोगों द्वारा माने जाने की अधिक संभावना है।

    ध्यान रहे कि इस प्रयास में छात्र और छात्राएं, दोनों को शामिल किया जाए।

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  4. sharadji,
    aap ek nek aur maanavhit ka mahti kaarya kar rahe hain......
    paakhand k viruddh satya ka dhvaj khada karna saral nahin hota
    lekin aap jaise himmatvan jab saamne aakar muqabla karenge toh mujhe yakin hai ki satya ka divakar zaroor ujaagar hoga
    meri haardik shubh kaamnaayen ..............

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  5. आपने बहुत महान कार्य के लिये स्वयं को समर्पित किया है। अंधविश्वास, विकास में सबसे बड़ी बाधा है।

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  6. समाज से अंधविश्‍वास दूर करने का आपका यह प्रयास सराहनी हैं .. शुभकामनाएं।

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  7. आप इस काम को करिए, इस की बहुत आवश्यकता है। आरंभ कर डालिए।

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  8. कल भी एक बाबा लाला साईं गिरफ्तार हुए...जिस तरह हर दिन एक नए बाबा का भंडा फोड़ हो रहा है ,सुनने में लगता है जन -जाग्रति आई है..लेकिन जिस तरह से आसानी से यह अपना जाल फैलाते हैं मुझे यही लगता था कि कोई कानून इन्हें रोकने के लिए बना ही नहीं.
    अब आप ने बताया कि ऐसा कोई कानून बना है!
    जन जाग्रति बहुत जरुरी है मगर सिर्फ जनजागृति से कुछ नहीं होगा..क्योंकि एक आम नागरिक अगर शिकायत दर्ज कराये और उसकी शिकायत दर्ज न की जाती हो फिर?
    इस लिए अंधविश्वास फैलाने वाले पाखंडियों के खिलाफ सख्त कानून के साथ चुस्त प्रशासन की भी बहुत जरुरत है .धन्यवाद.

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  9. जब तक भगवान,भूत,परा शक्तियों की अवधारना हमारे समाज में व्याप्त रहेंगी ..चाँद मुठ्टी भर लोग कुछ नही कर सकते ..जरुरत है व्यापक स्तर पर जागरूकता फैलाने की, जो सिर्फ ब्लॉग से संभव नही है.आप अच्छा कार्य कर रहें हैं, अपना कार्य करते रहे.

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  10. आपके द्वारा दी गयी जानकारी ने इस कार्यक्रम के प्रति रूचि उत्‍पन्‍न कर दी है। लेकिन इस बात पर संशय है कि विभिन्‍न प्रस्‍तुतियों के द्वारा मन में जमे अंधविश्‍वास कैसे निकल जाता है।

    वैसे यह अच्‍छा प्रयास है, इसे जारी रखें। यदि ब्‍लॉग पर इस तरह की सामग्री भी प्रस्‍तुत की जा सके, तो अच्‍छा है।
    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

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  11. यह बाबा, यह ढोंगी, ओर यह साधू सब हमारे बनाये हुये है, जब हम इन की बातो मै आना बन्द कर देगे, लालच मै नही आयेगे तो कोई भी हमे उळ्ळू नही बना पायेगा, सब पाखंड है,
    राम राम जी की.
    मुझे शिकायत है
    पराया देश
    छोटी छोटी बातें
    नन्हे मुन्हे

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  12. मुझे सबसे ज्यादा चिढ इन बाबाओं से है, बिचारे भोले भाले इंसानों से क्या क्या नहीं करवाते, कोई साईं, कोई बापू, बड़े बड़े गुंडे हैं !! जो धर्म की आड़ मैं न जाने क्या क्या गुल खिलाते हैं !!!!आपका प्रयास अच्छा है !! लगे रहिये !!

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  13. शरद भाई,
    बहुत ही सुंदर काम कर रहे हैं आप। धीरे धीरे आपके सभी ब्लाग पर नज़र डाल रहा हूं। वक्त का तोड़ा ऐसा ही कि क्या कहें। सब साथी ब्लागर जो कुछ कर रहे हैं, उसे नजर भर देखना नसीब में नहीं है। विज्ञान का मैं भी विद्यार्थी रहा हूं, अंधश्रद्धा निर्मूलन मुहीम में रुचि है। धार्मिक कर्मकांडों से बिदकता हूं। शुरू में विज्ञान विषयक चिट्ठा बनाने की ख्वाहिश थी, पर भाषाविज्ञान मुझ पर हावी रहा है और शब्दों का सफर के नाम अपना सारा समय सुरक्षित है।
    आप सबके काम को लगातार देखता रहूंगा।
    जैजै

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  14. aapke blog par phli bar hi aana hua hai . aapne jo kam shuru kiya hai bhut hi nek kam hai jiski aaj samaj ko sakhat jarurat hai .
    shubhkamnaye swekare.

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  15. इस नेक काम की शुरुयात के लिए बहुत बहुत शुभकामनायें!

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  16. अन्धविश्वासों के खिलाफ आगे आयें:------ main aapke saath hoon...........


    Sharad ji...... namaskar........ apke mulyawaan comments ke liye dhanyawaad........ main aapki baat se sahmat hoon....... ki prem ki yeh upmaayen ab purani ho gayin hain....... lekin yeh purani upmaayen hi kai baar hamari dil ki awaaz hoti hain....... jaise ham purane dinon ko yaad karke khush hote hain......purane gaanon ko saraahte hain........ aur purane zamane ki taareef hi karte hain....... usi tarah prem ki kuch apni bhi upmaayen hain...... jo hamesha boli aur kahi jayengi....... bhale hi wo purani ho gayi hon........ upmaayen waise bhi kabhi purani nahin hotin........ bas! kahne ka andaaz ham badal dete hain........ waise to main angrezi lekhan karta hoon...... hindi mein shuruaat ki........ to safalta achchi mili...... bas aapke ashirwaad ki zaroorat hai....... apka yeh chota bhai....... apki margdarshan chahta hai chahta hai.........Aisse hi hausla badhate rahiye......

    Regards........


    Mahfooz.......

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  17. शरद जी

    बहुत ही महत्‍वपूर्ण कार्य कर रहे हैं आप। यह एक प्रकार का यज्ञ है।
    एक प्र
    भावशाली ढंग नाटकों के माध्‍यम से है। आपकी विषयवस्‍तु के नाट्य रूपांतरण में मैं आपकी सहायता कर सकता हूँ

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  18. sriman ji,
    agar andhvishvash jaadu, tona khatam ho jayega to samaj k dharmik thekedaaro ka kya hoga .is sambandh mein bharat bhushan ki ye linein sateek hai .

    "na janm leta agar kahin
    dhara bani uyadi mashan hoti
    na mandiro mein mridang bajte
    na mashjido mein ajaan hoti
    na janm leta agar kahin main"

    suman

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  19. bhoot preyat jaisi joi cheez nahi hoti bas se insaano ka veham hota hai unhe aisa lagta hai ki koi unhe dekh raha hai koi unka peecha karr raha hai .....aaj ke zaamaney me aise cheezo parr bas vo hi log vishvash karte hai jo ki ill-litrate hai jaise villagers log .......ye log aaj bhi bhoot preeto me vishvash karte hai.....

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अन्धविश्वासों के खिलाफ आगे आयें